Friday, 14 October 2016

वर्जिन लड़की की छूट का खून

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मेरा नाम नवीन उम्र 22 साल है. मैं देल्ही मे अकेला रहता हूँ. मेरा होमटाउन आमेडबॅड है. मेरी हाइट 5 फीट 5 इंच की है. रंग गोरा और वजन 70 क्ग्ज़ का है. मेरी सेक्स की डिज़ाइर आम लोगो से बहुत ज़्यादा है. वाहा कुछ लड़कियो से मेरे संबंध है.

ये बात है डिसेंबर 2014 की सर्दियो की. मैं अपने ऑफीस के काम से आमेडबॅड गया था. मैं वाहा कुछ दीनो तक रुकने वाला था. जैसे मैने बताया आह्मेबाद मेरा होमटाउन है. वाहा मेरा घर है. वाहा कुछ दिन मैने अपने ऑफीस का काम किया. मेरा मॅन वाहा नही लग रहा था, मैं वाहा से जाना चाहता था. लेकिन मेरी ऑफीस का काम ख़त्म नही हुआ था. मैं सुबह जल्दी ऑफीस चला जाता था और रात को देर से वापस आता था. मेरे कुछ 2-3 दिन ऐसे ही काट गये.

सॅटर्डे को मैं घर जल्दी आ गया. शाम को मैं डिन्निंग टेबल पर बैठ के समोसे कहा रहा था. समोसे बहुत ही अच्छे बने थे. मैं मज़े से कहा रहा था तभी पीछे से आवाज़ आई: “आंटी?”
मेरा ध्यान समोसे और टीवी पर था.
मेरी मा ने कहा: “नवीन इसे पहचानो?”
मैने बिना देखे बोला: “मा मुझे लड़की पसंद है.”

मेरी मा ने पीछे से मुझे हल्के से थप्पड़ मराते हुई बोली: “ये आलिया है. सुरेशभाई की बेटी. कुछ दीनो पहले ही इसकी सगाई हुई है.”
मैने फॉर्मर्ली उससे ही हेलो की और मैं वाहा से चला गया. मैने उससे ज़्यादा बात नही की ना उसे गौर से देखा.

मैं ज़्यादातर लड़कियो को इग्नोर कराता हूँ. क्यूंकी फिर वो लड़किया रात मे मुझे चैन से सोने नही देती.

आलिया भट्ट मेरे पापा के सबसे अच्छे दोस्त सुरेश भट्ट की बेटी है. Alia bhatt age is 18 years. पिछले 10-20 सालो से दोनो दोस्तो के बीच बात चित बाँध थी. और हाल कुछ दीनो पहली ही रिश्तो मे सुधार आया था. आलिया की मा जब आलिया 10 साल की थी तभी गुजर गयी थी. आलिया अपने पापा, भाई और भाभी के साथ रहती थी.

अगले दिन सनडे था. मैं सुबह ऑफीस जा रहा था.
मा ने कहा: “नवीन ये मिठाई का बॉक्स सुरेशभाई को दे आ.”
मैने कहा: “क्या हुआ सुरेश अंकल फिर से शादी कर रहे है?”
मा ने कहा: “नही बदमाश. श्वता (आलिया की भाभी) की गोड़भराई है. हम सबको भोपाल जाना होगा. सुरेशभाई ने मिठाई की ज़िम्मेदारी तुम्हारे पापा को दी थी. इसलिए ये मिठाई के बॉक्स उनके यहा दे आओ.”
मैने कहा: “ठीक है.”

मैं आलिया के घर पह्ोचा. वो सब लोग नाश्ता कर रहे थे. इतने मे आलिया किचन से निकली. उसको देखते ही मेरे होश उस गये. वो क्या लग रही थी. उसने विंटर की सुबह मे तीन कपड़े का नाइट ड्रेस ही पहन रखा था. अंदर कुछ नही पहना था. उसके मीडियम साइज़ के बूब्स, उसकी कमर, उसकी गान्ड. ये सब देखकर मेरा लंड जीन्स के अंदर तुरंत खड़ा हो गया. मैने अपने दोनो पैरो से उसे संभाला. मैं जेसे उसे देख रहा था वो तुरंत अपने रूम मे चली गयी. मुझे कुछ समाज नही आ रहा था.

मैने सुरेशुंकले से पूछा: “आप लोगो को ठंड नही लगती.”
उन्हो ने कहा: “हमे सिर्फ़ शाम और रात को ही ठंड लगती है. सुनो नवीन तुम्हे हमारे साथ भोपाल चलना है. बहुत सालो बाद तुम मिले हो इस बार तुम्हे नही छोड़ेंगे.”
अमर (आलिया का भाई) बोला: “हां यार चलो अब मेरे बाद तुम्हारा नंबर है, ये सब देखलो और सिख़लो.”

मैने कहा: “नहीं अंकल मुझे ढेर सारा काम ख़त्म करना है और अगले वीक वापस जाना है.”
सुरेश अंकल: “अगर तुम हमारे साथ आते तो बड़ा मज़ा आता. घर पर अकेले रहोगे? खाना कहा खाओगे?”
मे: “अंकल मुझे अकेले रहने की आदत हैं. बाहर खाना खलूँगा.”
सुरेश अंकल: “नहीं. आलिया खाना पहुचा देगी.”

मे: “नहीं. मेरा कुछ फिक्स नहीं होता. मैं कब खाना ख़ौ.”
सुरेश अंकल: “कोई बात नही आलिया खाना तुम्हारे घर पर रख कर चली जाएगी. तुम कहा लेना.”
बहुत बहस के बाद मैं मन गया.
मे: “आलिया नही आ रही भोपाल?”

सुरेश अंकल: “नहीं जमाई राजा मिलने आने वाले हैं. वो कुछ दीनो के लिए मुंबई काम से जाने वाले हैं इसलिए ट्यूसडे को आलिया से मिलने आ रहे हैं.”
मैं थोड़ी देर वाहा पर बैठा और फिर चला गया.
लेकिन आलिया मेरे दिमाग़ से निकल ही नही रही थी.
हमेशा से आलिया के लिए मैं कुछ फील कराता आ रहा था, पर मुझे अपनी फीलिंग्स एक्सप्रेस करनी नही आती.
उस सनडे की रात मैं सो ही नही पाया.

अगले दिन मंडे सब लोग भोपाल के लिए चेलिए गये. अब आमेडबॅड मे सिर्फ़ मैं और आलिया बचे थे. आलिया और मेरी मा ने मेरे खाने के बड़े मे फोन पर बात करली थी. मंडे मा खाना बनाकर गयी थी. मैने रात को ओवेन मे गरम करके कहा लिया. फिर से नींद नही आई. आलिया नाइट ड्रेस मे मुझे पागल कर रही थी. ऐसा पहली बार हुआ था.

फिर ट्यूसडे को मैं सुबह जल्दी ऑफीस चला गया. फिर मुझे याद आया की आज आलिया का मंगेतर आने वाला था. मैने आलिया को फोन किया. उसकी आवाज़ भी मुझे सेक्सी लगती थी. तब वाहा हितेश (आलिया का मंगेतर) मोजूद था. उसने मुझे रात को साथ मैं खाने पर बुलाया.

मैं रात को खाने पर गया. आज आलिया एकदम मामूली दिखती थी. मुझे कुछ समाज नही आया. वो बड़ा अजीब बिहेव कर रही थी. खाने पर सिर्फ़ मैं और हितेश ही बात कर रहे थे. आलिया शांत थी. मुझे वाहा ऐसा लगा दोनो के बीच जगदा हुआ हैं. वरना न्यूली एंगेज्ड कपल ऐसे बिहेव नही करते. वैसे हितेश बोरिंग और चिपकू किसाम का था. मुझे कुछ ख़ास अच्छा नही लगा. आलिया के घर से जाते जाते मैने कहा: “ये लो घर की दूसरी चाबी. तुम आराम से खाना पह्ोचना. मैं सिर्फ़ रात को हो चाओं से कहा पाता हूँ.”

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