Friday, 7 October 2016

प्रीतेश ने कामवाली की चुदाई की

हाय दोस्तों मेरा नाम नीना हे और में गुजरात के एक छोटे से सहर से हूँ दोस्तों पहले तो में अपने बारे में सब कुछ बता दू मेरे घर में में और मेरी माँ हम दो ही लोगो का परिवार हे मेरी माँ मेरे लिए सब कुछ हे मेरी माने मेरे पापा के गुजर जाने के बाद बड़ी मुस्किलो से बड़ा किया हे तो अब जब मेरी माँ बीमार हे तो में उसे केसे इसे ही छोड़ देती.

दोस्तों फिलहाल मेरी उम्र १९ साल हे और में १२ तक पढ़ी हूँ मेरी माँ घर घर जाके काम करती थी और हम दोनों का गुजरान चलता था जबसे माँ बीमार हे उसकी दवाई के पेसे तो ठीक घर में दो वक़्त की रोटी के भी लाले पड़ने लगे तो इसे में मेने माँ को मन लिया और में खुद ही वो जहा जहा काम करती थी वह में खुद ही काम करने जाने लगी.

दोस्तों में एक बड़ी सोसाइटी में काम करती हूँ जहा पूरा दिन काम करती हूँ ४ घर में काम करते करते कब पूरा दिन गुजर जाता हे पता ही नहीं चलता. दोस्तों चलो में अपनी बात पर आती हूँ. एक दिन में अपने रोजमर्रा के अनुसार पाने काम पर सब के घरो के काम ख़तम करके में अतिम घर का काम समाप्त करने के लिए उनके घर पहोंची.

मे जहा काम के लिए गयी थी वह सिर्फ चार लोगो का परिवार हे पति पत्नी दो और दो उनके बच्चे जिसमे एक बेटा था १५ साल का जो मेरी मेमसाब और मेरे साहब के साथ गया हुआ था. और दूसरा बेटा था २५ साल का जो अभी घर में मोजूद था. उसका नाम था प्रीतेश.

जब में घर एम् दाखिल हुई तब प्रीतेश नहाने की तैयारिया कर रहा था शायद वो बाथरूम में जा रहा था. मेने उसकी तरफ खास कुछ ध्यान नहीं दिया और में अपने काम में लग गई. सब काम ख़तम करके में अपने घर को लोटने जा रही थी की मेरी नजर प्रीतेश के कमरे में पड़ी.

प्रीतेश अपने कमरे में एक दम नंगा घूम रहा था. शायद वो कमरे में कुछ धुंद रहा था. में उसे कमरे में इधर उधर घूमते हुए देखती रही में उसका लटक मटक होता लंड देख रही थी मेरी नजर चाहकर भी उसके लंड पर से हटती नहीं थी. में तो बस उसका मोटा और शायद ७ इंच का लम्बा होगा वो लंड देख रही थी मुझे उसका लंड देखने में इतना मजा आ रहा था तो आगे…….

दोस्तों में आगे का सोच कर ही पानी पानी हो गयी. मेने सोचा की देखने में इतना मजा हे तो फिर उसे चाटने में कितना मजा आता होगा. उसे चूसने में कितना मजा आता होगा. सोच सोच कर ही मेरे मुह में पानी उभर आया और मेरी चूत से भी पानी निकलने लगा. जिससे मेरी सलवार पूरी तरह से गीली हो गयी थी.

वो तो अब भी नंगा ही घूम रहा था में अपनी जगह से हट कर उसके कमरे के दरवाजे तक घुसी गई. मेने अब करीब से देखने का मजा उठाया लेकिन अब तो मुझे उसके मोटे लम्बे लंड को हाथो में पकड़ना था उसे मुह में लेना था उसे चुसना था.

अब तो मेरी चूत में भी खुजली होने लगी थी. में क्या करती मुह से खयालो खयालो में ही उसे चूसने लगी और अपने हाथ से ही अपनी चूत को खुजाने लगी. बड़ा मजा आ रहा था. में तो मग्न थी अपनी मजेदार अदाओं में मुझे पता ही नहीं चला कब वो दरवाजे के पास आया और मेरी चूत पर खुजाती उंगलियों को देखता हुआ वो वही पर बेथ गया.

जब मेने उसे देखने के लिए आँखे खोली तो देखा वो ठीक मेरी चूत के पास बेठा था.पहले तो में उसे देख कर घबराई की वो मुझे एसी हरकत करते हुए देख गया हे तो मुझे थोड़ी थोड़ी शर्म भी आई लेकिन अभी शर्म के लिए मेरे पास कोई समय नहीं था तो मेने खुद ही शर्म को हटा दिया अपने आप से और में प्रीतेश बेठा था उसी तरफ अपने कमर को आगे करके अपनी चूत को आगे की वो अब आगे बढ़ा और उसने सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत पर हाथ फेरा अब मेरी हिम्मत दुगनी हो गयी.

मेने अपनी सलवार को निकाल दी और अन्दर मेने जो पिंक कलर की पेंटी पहनी थी वो भी निकाल दी और टॉप को गर्दन तक ऊपर कर दिया और मेने अपनी पिंक कलर की ब्रा को भी गरदन की और ऊपर चदा दिया अब कपडे सिर्फ नाम के थे मुझे पर में भी अब पूरी तरह से नंगी थी.

वो कभी मेरी चूत पर हाथ घुमाता कभी मेरे गुलाबी गुलाबी बूब्स पर हाथ फेरता था.अब उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया. और फिर थोड़ी देर तक वो मुझे बाहों में भर कर ही अपने बदन से बदन को घिसने लगा. और फिर खुद उसने ही मेरे टॉप और ब्रा को ऊपर से निकाल दिया.

फिर दोस्तों वो मुझे अपने बेड पर ले के गया. जहा उसने मुझे लेटाया और फिर वो मेरे ऊपर सो गया और मेरे जिस्म को चूमने लगा ३०  मिनट तक वो मेरे बदन को चाटता रहा और चूमता रहा. फिर वो मेरी चूत की और घुसा और मेरी चूत को हलके हलके हाथो से मालिश करने लगा जिससे में और भी कामुकता में गरक होती गयी. में भी अब उसके बदन को चूमने चाटने लगी थी दोस्तों में तो इतनी कामुकता की देवी हूँ की पूछो ही मत में बहुत बहुत सेक्सी सेक्सी हूँ कोई देखते ही मुझे चोदने के सपने सजाने लगे. इस प्रीतेश का भी यही हाल था.

अब तो वो मेरे बूब्स को दबाने लगा था उसने मेरे बूब को दबा दबा कर दर्द कर दिया था लेकिन मुझे तो बहुत अच्छा लग रहा था. में मजे उठा रही थी और वो भी मेरे सरीर को चोदने का मजा लूट रहा था अब चूत को चोदने की बारी थी अब ना तो प्रीतेश रह सकता था और नाही में रूक सकती थी अब हम दोनों को चुदाई करनी थी वो भी जम कर.

मेने खुस ही अपने दोनों पेरो को फेला दिया उसने आराम से लंड को मेरी चूत के ऊपर टिकाया और फिर वो धक्के देने लगा और काफी देर तक उसने धक्के दिए लेकिन जा ही नहीं रहा था मेरी चूत कामुकता का पानी निकल निकल कर गीली हो गयी थी.

अब तो उसने पुरे झोश में आके अपने लंड को इतने झोर से धक्का दिया के एक ही धक्के में उसका लम्बा लंड मेरी चूत के अन्दर घुस गया जब उसका लंड मेरी चूत के अन्दर घुसा तो आआआआआआआह्ह्ह आःह्ह आआअहा कितना मजा आ राह था मजे आते ही हम दोनों के मुह से आह्ह्ह्हह्ह्हह्हा आआआआआअह्ह्हा जेसे सब्द निकलने लगे. अब वो मुझे अपने लंड को अन्दर बहार कर कर के चोदने लगा था मुझे बहुत मजा आ रहा था दर्द हो रहा था लेकिन उसकी परवाह कोण करता हे .

में और प्रीतेश मजे उठाते रहे कामुकता में गरक होते गए. हम दोनों जम कर चुदाई कर रहे थे. वो झोर झोर से मेरी चूत में लंड से झटके लगा रहा था. दोस्तों में अपनी गांड हिला हिला कर उसे चोद रही थी. हमने ५० मिनट से ज्यादा देर तक चुदाई की फिर वो मेरी चूत के अन्दर ही झड गया फिर हम दोनों उठे और नहाए और फिर में अपने घर चली गयी.

अब तो जब भी हम दोनों का मन करता हे हम दोनों चुदाई करते हे.

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