Friday, 20 November 2015

अंजलि भाभी की चुदाई

हेलो भाभी, मैं राज ठाकुर, एक एरिया सेल मेनेजर – मल्टी नेशनल कंपनी में काम करता हु. महीने के १५ दिन, मैं बाहर रहता हु. मुझे जगह – जगह जाना पड़ता है. एक बार, मैं कंपनी के काम से गोवा गया था. जहाँ मैं होटल वुडलैंड में रुका था. ३ दिन का ट्रिप था. दिन भर काम के बाद, मैं अपने रूम में वापस आ गया और फ्रेश होने के बाद टीवी देख रहा था. कि अचानक मुझे बाजु वाले कमरे से जोर की आवाज आई. मैं वहां दौड़ कर गया और रूम का दरवाजा खटखटाया. अन्दर से आवाज आई, कि कॉम इन. मैं अन्दर गया, तो वहां एक भाभी अपने बेड पर लेट कर टीवी देख रही थी. भाभी – हाँ बोलो. कौन है आप? क्या चाहिए? राज – कुछ नहीं. बस ऐसे ही मुझे एक आवाज़ आई, तो मैं पूछने चला आया, कि सब ओके है ना? फिर, मैं रूम में बाहर आने लगा. इतने में पीछे से भाभी की आवाज़ आई – सुनो, कहाँ से हो तुम? क्या नाम है तुम्हारा? यहाँ क्या कर रहे हो? राज – कंपनी के काम से आया हु. इंदौर का रहने वाला हु.

भाभी – असल में, मैं बहुत बोर हो रही थी. इसलिए गुस्से में मैंने रिमोट पटका था. मैं यहाँ पर अपने बेटे के स्कूल के एनुअल डे के लिए आई हु. शाम हो चुकी थी. मैंने भाभी को पूछा – ये बात है? रात के डिनर क्या प्लान है? चाहो तो, मैं तुम्हारे साथ… ओह… सच्ची.. वो खुश होकर बोली. ओके.. अनजान हो, पर सीधे लगते हो. कोई बात नहीं. मैं फ्रेश होकर तुम्हे नीचे मिलती हु. मैंने ओके कहा और चल दिया. अपने कमरे में फ्रेश होते हुए, मेरा मन डगमगाने लगा. क्यों पता नहीं… भाभी के तन मेरे आगे आने लगा और मैं उन पर आकर्षित होने लगा. मन कर रहा था, कि बस आज रात भाभी मेरे ही कमरे में रह जाती. तो बस क्या बात होती. होटल में खाना खाते समय बहुत बातें की. कुछ चुटकुले भी सुनाये. काफी हँसी – मजाक हुई. फिर जब हम अपने होटल पहुचे, तो लिफ्ट में अचानक से हम दोनों शांत हो गये और मुझे अन्दर से मन कर रहा था, कि भाभी के होठो को चूमकर गुड नाईट विश करू. पर क्या करता था, कुछ सिग्नल ही नहीं मिल रहा था.

अब हम अपने अपने रूम में वापस जा रहे थे. तो मैंने भाभी को बोला, अब तो बोर नहीं होंगी ना? नीद आएगी ना? किसी को सुलाने के लिए भेजू? वो वो हंसकर बोली, जाओ अपने कमरे में और सो जाओ. मैं भी अपने रूम में चला गया. फ्रेश होते समय मुझे मेरा लिंग टाइट महसूस हुआ और मैंने भाभी के तन के बारे में सोचते हुए हिला लिया. बहुत अच्छा लग रहा था. फिर, मैं सोने चला गया. आधी रात को, मैं वापस मचला और मुझे भाभी की याद सताने लगी. मैं अपने कमरे से बाहर आ गया. मैंने देखा, कि भाभी के कमरे की लाइट जल रही थी. मैंने दरवाजा खटखटाया. उसने नीद्रा अवस्था में दरवाजा खोला, वो सिर्फ मिनी पहने हुए थी. बहुत सेक्सी लग रही थी. मुझे देखकर बोली – क्या हुआ? इतनी रात को यहाँ कैसे? कुछ प्रॉब्लम? मैंने मौके का फायदा उठाया और बोला, कि मेरा सीना जल रहा था, पता नहीं क्यों? शायद खाना नहीं पचा. भाभी ने बोला – ठंडा दूध मंगवा दू? मैं कहा – मंगवाने की क्या जरूरत है?

भाभी बोली – क्या? शायद वो समझी नहीं थी. उन्होंने रूम सर्विस को फ़ोन करके एक ग्लास ठंडा दूध मंगवा लिया. जब तक दूध आता, मैं अपनी गर्लफ्रेंड की बातें कर रहा था. दूध आने पर, मैं बोला – भाभी, मैं अपने कमरे में ही पी लूँगा. भाभी बोली – नहीं, तुम यही पियोगे. मैंने कहा – मेरा शायद दूध पिने का स्टाइल अलग है. भाभी बोली – दूध पीने में भी स्टाइल? बोलो – कैसे पियोगे? मैं बोला, कि मैं सीधा स्तन को मुह लगाकर पीता हु. भाभी शर्मा गयी और बोली – अरे… अब भाभी को सब समझ आ गया था. पता नहीं, उन्हें क्या हुआ? उन्होंने बोला – यहाँ आओ, मैं तुम्हे अलग – अलग तरीके से दूध पिलाती हु. मैं भाभी के साथ सीधे बेड मेर घुस गया. पहले, उन्होंने अपने मुह में दूध भरा और मुझे होठो पर चुमते हुए, दूध अपने मुह से मेरे मुह में डाल दिया. मुझे बहुत अच्छा लगा. मैंने बोला और कहाँ से पी सकता हु? फिर धीरे – धीरे भाभी ने अपनी मिनी की स्ट्रेप उतार कर अपने बूब्स पर दूध गिराया और मुझे कहा – पियो…

मैं तो पागल ही हो गया था. गोल बूब्स, पिंक निप्पल, उस पर वाइट दूध की बुँदे, उफफ्फ्फ्फ़.. फिर लेट कर अपनी पेंटी दूध से भिगायी और बोली – अब इसे पियो. मैं भाभी की पेंटी चूस रहा था और मैंने उनकी चूत गीली कर दी. मैंने उनकी पेंटी निकाल दी और उनकी चूत पर दूध गिरा कर पीने लगा. मैंने एक बूंद दूध का नीचे नहीं गिरने दिया. फिर, भाभी ने बचे दूध का गिलास मुझसे लिया और मेरे फनफनाते हुए लंड को डुबोया और सारा का सारा चाट गयी. बहुत मज़ा आ रहा था. भाभी फुल मूड में आ चुकी थी. हम ६९ पोजीशन से मज़ा ले रहे थे. फिर भाभी ने मेरे लंड को टाइट पकड़ा और कहा, कि अब इसे मलाई खाने दो. मैंने भी आव-ना-ताव, मैंने अपना लंड डाल दिया भाभी की रसीली चूत में. बहुत अच्छा लग रहा था. भाभी जोर – जोर से सिसकिया ले रही थी. मैं इतना मज़े में था, कि मैंने अपने लंड से निकली मलाई भाभी की चूत में ही गिरा दी. भाभी बहुत खुश नज़र आ रही थी, तो भाभी ने मुझे चोदा नहीं था.

वो चाहती थी, कि मैं तुरंत उन्हें दूसरी बार चुदु. उनकी भूख नहीं मिटी थी. उन्होंने फिर से मेरे लंड को देह्लाया और मुझे फिर से उतेजित कर दिया. इस बार, भाभी मेरे ऊपर थी. उन्होंने मेरे लंड को अपनी चूत में सटा दिया. अब वो जोर – जोर से अपनी चूत मेरे लंड पर पटक रही थी. मैं अपने आप को कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा था. मैंने भाभी को नीचे उतारा और उनके ऊपर चढ़ गया. भाभी ने अपनी दोनों टाँगे फैला दी थी. मैं भाभी की चूत का रस पी रहा था. और भाभी को चोद रहा था. लास्ट में, मैंने भाभी के मुह में, मैं अपने लंड से निकली मलाई खिलाई. भाभी ने अच्छे तरीके से मेरे लंड को चाटकर साफ़ कर दिया. और फिर वो मेरे लंड को पकड़कर सो गयी. रात भर मैं भाभी के साथ सोया रहा. सुबह – सुबह भाभी जब नहाकर टॉवल में बाहर आई और मुझे उठाने लगी. जब मैं नहीं उठा, तो उन्होंने कहा – गरम दूध पी लो. हमने फिर से एक बार और सम्भोग किया. बहुत अच्छी भाभी थी, आज भी मैं उसके टच में हु.

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