Sunday, 9 August 2015

दोस्त की बहन की चूत ली

विपुल और मैं बहुत ही अच्छे दोस्त थे और हमेशा एक साथ ही भी घुमा करते थे. हालांकि मेरे और भी कई दोस्त थे जिनके साथ में रहता था पर उनमें से सबसे अच्छा और करीबी दोस्त एक विपुल ही था मेरा. मुझे उसके और उसके परिवार के बारे में भी सब कुछ पता था क्यूंकि हम दोनों का रोज एक दूसरे के जो घर आना जाना बनता ही रहता था. मैं एक दिन जब उसके घर में गया तो देख की एक मस्त आकर्षक लड़की आई हुई थी उसके घर पर जब मैंने उससे पूछा तो पता चला की वो उसकी चचेरी बहन थी और बस मैं एक बारी में ही अपने दोस्त को अपना साला बनाने के लिए तैयार हो चूका था. जी हाँ उसकी यह बदन देखने में ही मस्त सेक्सी माल था, और वो उन केटेगरी की लड़कियों में थी जिसे देख के लंड को खड़ा होने में जरा भी देर नहीं लगती हैं.

उसकी बहन का नाम शाक्षी था था और उसके पहनावे जो की बिन बाजू वाला टॉप और छोटी सी स्कर्ट को उस लड़की ने नए जमाने के ख्यालों को साफ़ बरकरार कर रहा था. विपुल ने मेरा इंट्रोडक्शन साक्षी से करवाया और यकीन मानियें मेरा ध्यान तो उसके चुंचो में ही था. अब जब मैं विपुल की चचेरी बहन शाक्षी का दोस्त हुआ तो उससे बात करना तो बनता ही है. मैंने उसे परिचय दिया और हलकी – फुलकी बातें करनी चालू कर दी. वो तो मुझसे दो पल में ही खुल गयी और मुस्काते हुए बतियाने लगी और मैं एक बार में ही उसके साथ सेक्स के ख्याल बुनने लगा.  अब वो मुझे जब भी नीचे मिलती तो मैं अपने दोस्त से छुपकर उससे बातें भी किया करता था और धीरे – धीरे वो भी मेरी दोस्त सी बन ही चुकी थी.

एक दिन मैं अपने दोस्त के घर पहुंचा तो पता चला की शाक्षी घर पर अकेली है और मैं यह मौका अपने हाथ से कैसे जाने देता. मैं वही शाक्षी से कुछ आधा घंटा बात करने लगा तो और फिर बीच में धीरे – धीरे उसकी तारीफें करता हुआ उसके हाथ को अपनी उँगलियों से सहलाने लगा जिसपर उसने मुझे नहीं रोका. मुझे अब समझ आ ही गया था की मेरा आगे रास्ता बिलकुल साफ़ है और  मैं अब उसके चुचों को उसके टॉप के उप्पर से ही दबा रहा था. मैं उसके टॉप को उतारकर उसके चुचों के पहले अपनी हाथों से हौले – हौले खेलता हुआ फिर उन्हें मुंह में भरकर चूसने लगा था. मैंने धीर – धीरे कर शाक्षी के पुरे ही कपड़े उतार और वहीँ सोफे पर नंगी कर उसकी चुत को उप्पर से मसलने लगा. मेरे लंड के अंदर जैसे की नई जान आ गई थी. लंड जैसे मेरी पेंट के अंदर चुभ रहा था.

मैं अब धीमी रफ़्तार में उसे अपने होंठों से चूमता हुआ अपनी ऊँगली उसकी आकर्षक चुत में डालने लगा जिसपर शाक्षी सिसकियाँ लेती हुई तडपने लगी थी. मैंने अब अपने लंड को को निकाला एक बारी में शाक्षी की चुत में दे मारा और फिर चुदाई के धक्कों के साथ अंदर डालने लगा लगा. शाक्षी सोफे पर लेती हुई अपनी चुत को अपनी उँगलियों से उप्पर से खुजा रही थी. ना जाने किस हवस की चोट ने हम दोनों को जकड लिया था. मैं अपने दोस्त की बहन को अब जमकर पेले जा रहा था और अब हमारे बीच एक इंच की भी दुरी नहीं थी.

साक्षी के मुहं से हलकी हलकी सिसकियाँ निकल रही थी और वो अपने कूल्हों को उठा के सोफे में उछल रही थी. मेरी जबान उसके चूंचियों की चूस रही थी और लंड अपनी चूत खुदाई में ही लगा हुआ था. साक्षी के चूत से निकल रहे पानी ने मेरे लंड को मस्त चिकना बनाया हुआ था. साक्षी अपनी गांड को उठा उठा के मुझ से चुदने के अपने सारे अरमान जैसे वसूल रही थी. मेरे तगड़े लौड़े में जैसे अजब ताकत थी आज तो. मैं अपना पूरा लौड़ा डाल के फिर उसे एक झटके में बहार निकाल रहा था. उसके बाद मैं फिर से लंड को साक्षी की चूत में पेल रहा था. साक्षी और मेरी दोनों की साँसे फूली हुई थी और दोनों ही आह आह कर रहे थे.

अब मैंने अपना लंड साक्षी की चूत से बहार निकाला. साक्षी को कमर से पकड के मैंने सोफे में उल्टा दिया. उसकी सेक्सी गांड अब मेरे सामने थे. गांड को फाड़ के मैंने उसकी गांड के छेद पे ऊँगली फेरी. लेकिन मेरा इरादा गांड मारने का बिलकुल भी नहीं था अभी तो. मैंने अपने लौड़े को फिर से साक्षी की चूत के उपर रख दिया. साक्षी ने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड के मुझे चूत के अंदर डालने में जैसे मदद की. फिर एक ही झटके में मैंने लौड़े को उसके पेट तक घुसा दिया हो जैसे. साक्षी एक बार फिर से सिसकियाँ लेने लगी और उसने अपने हाथों से गांड को चौड़ा भी किया जिस से दर्द कम हो सकें. मैंने अपने लौड़े को उसकी चूत में फचफच की आवाज से अंदर बहार करना चालू कर दिया. फच फच की आवाज से मेरा लंड साक्षी की चूत से बातें कर रहा था जैसे. साक्षी अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर के मुझे मजे दे रही थी.

तभी मुझे लगा की जैसे मेरा सारा खून लंड की और दौड़ रहा हैं. मैं समझ गया की मेरा पतन होने को हैं. मैंने और भी जोर जोर के झटको से अपने लंड को साक्षी की चूत में पेलना चालू कर दिया. साक्षी भी जोर जोर से अपने कूल्हों को उठा के मेरा साथ देने लगी. दोनों ही चुदाई की चरम सीमा पे थे. हमारे पसीनों के साथ कामरस भी निकलने को हुए और दोनों झड़ते हुए बस एक दूसरे के मुंह भरकर चूसने में लगे हुए थे. उस दिने से शाक्षी मेरी सेक्स की खिलौनी जैसी हो गयी थी जिसकी चुत से जब मन चाहें मैं खेल लेता हूँ.

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